आज हम आपको बापू यानी राष्ट्रपिता यानी महात्मा गाँधी के बारे में एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहे हैं जो आपने शायद ही पहले कभी सुनी हो. ये कहानी है बापू के बापू बनने के पहले की, यानी जब वो बापू नही बने थे और आपकी हमारी तरह एक आम इंसान ही थे.
उन दिनों वो दक्षिण अफ्रीका में थे, जहाँ वो अपनी नयी-नयी शुरू हुई वकालत के काम के सिलसिले में गए थे.

एक बार वो अपने बाल कटवाने एक हजाम की दूकान पर गए. हालाँकि दूकान तो सही थी, लेकिन हजाम था फिरंग, मतलब गोरा, मतलब की पूरा वाइट. उसने अपने दूकान में काले नस्ल के इंसान के बाल काटने से इनकार कर दिया. उस वक़्त दक्षिण अफ्रीका में काले और गोरों के बीच रंगभेद अपने चरम पे था और काले लोगों को उस समय उसी दृष्टि से देखा जाता था जैसा हिन्दुस्तान में ऊँची जात वाले, नीची जात वालों को देखते थे. जैसे हमारे यहाँ अछूत थे, वैसे ही अफ्रीका में काले. तो जब हजाम ने गाँधी के बाल काटने से इनकार कर दिया तब गाँधी तो बुरा तो लगा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने वो किया जो हम और आप शायद सपने में भी ऐसा करने का न सोचे. अगले ही पल उन्होंने एक कैंची खरीदी, घर आये और आईने के सामने खडे हो कर अपने बाल खुद काटने शुरु कर दिए. सर के आगे के बाल तो ठीक-ठाक कट गए लेकिन सर के पीछे के बाल सही से काटने में गाँधी गच्चा खा गए.

अगले दिन सुबह जब गाँधी कचहरी पहुँचे तो सब लोग देख कर हँसने लगे. एक सज्जन ने फब्तियाँ कसी, “क्यूँ गाँधी, तुम्हारे बालों को क्या हुआ, चूहे खा गए?”
गाँधी ने कहा, ” गोरे हजाम ने मेरे काले बाल काटने से मना कर दिया, तो मैंने सोचा की क्यों न अपने बाल मै खुद ही काट लूँ.”

किसी ने कोई जवाब नहीं दिया और गाँधी आगे बढ़ गए. गाँधी आगे बढ़ गए, क्यूंकि उन्हें बोहोत आगे जो बढ़ना था,जाने-अनजाने में बापू जो बनना था.

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