नेहरू-गाँधी परिवारिक योजनाएँ – नाम की राजनीति और बेनाम हिन्दुस्तानी

cj

ऋषि कपूर हर एक भारतीय घर में जाना पहचाना नाम है। उनके एक्टिंग के जलवे से वो अपना लोहा इस उम्र में भी मनवा रहे हैं। लेकिन उनकी एक्टिंग की इस दूसरी पारी के साथ उनका एक नया चेहरा सामने आया है और वो है उनका बेबाकी अंदाज़। वो ट्विटर पर काफी सक्रिय हैं और अपने विचारों को खुले तौर पर व्यक्त करने के लिए जाने जाते हैं। अभी हाल ही में जब उन्होंने ये मुद्दा उठाया की इस देश की लगभग सभी पब्लिक प्रोपेर्टी या स्कीम्स नेहरूगांधी परिवार के लोगों के नाम पर ही क्यों है तो जहाँ काफी लोगों ने उनका समर्थन किया तो वही काफी लोगों ने विरोध भी। कांग्रेस पार्टी ने भी जमकर उनकी आलोचना की और यहाँ तक कह डाला की शायद चिंटू जी का बीजेपी में जाने का इरादा है।

लेकिन जहाँ तक मुझे लगता है, उनका ये सवाल बिलकुल जायज है और कई हिंदुस्तानी इस बात से इत्तेफ़ाक़ भी रखते हैं। अगर इस देश की आज़ादी के समय से बात की जाये तो कई ऐसे हिंदुस्तानी रह चुके हैं जिन्होंने इस देश की आज़ादी और कामयाबी में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। ऐसे तो ये संख्या सैंकड़ो में है लेकिन अगर फिर भी कुछ लोगों को उनमे से चुना जाये तो भी ये लिस्ट काफी लंबी है। आज़ादी के वक़्त के आसपास की बात करें तो सरदार पटेल, लोकमान्य तिलक, गोपालकृष्ण गोखले, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, रवीन्द्रनाथ टैगोर ऐसे नाम हैं जो हर एक हिंदुस्तानी की जुबान पर आज भी हैं। और इस देश के लिए ये बहुमूल्य रत्नों से कम नहीं है। लेकिन फिर भी अगर इन महानायकों के नाम पर कोई चीज ढूंढी जाये तो विरले ही निकलेगी। ऐसे ही शास्त्री, विनोबा भावे और मदर टेरेसा जैसे लोगों का आज़ादी के बाद योगदान भुला नहीं जा सकता।

लेकिन अगर सरकारी योजनाओं पर गौर करें तो नेहरूगांधी परिवार ही छाया है। ऋषि कपूर ने सरकारी तंत्र के इस दुरूपयोग पर सवाल उठा कर बिलकुल वही काम किया है, जो कई आम हिंदुस्तानी कभी कभी अपने जीवनकाल में एक बार जरूर सोचता है की भाई हर चीज आखिर (नेहरू, इंदिरा या राजीव) गाँधी के नाम से ही क्यों है या होती है। क्या हो जायेगा अगर थोड़ी इज्जत शास्त्री को भी मिल जाये, एकदो पुलों के नामकरण में गाँधी का छोड़ किसी और हिंदुस्तानी का नाम जाये। आखिर बांद्रा सी लिंक का राजीव गांधी से क्या लेनादेना, क्यों उसे सत्यजित रे या लता मंगेशकर के नाम पर रखा जाये।

क्या ये गर्व और प्रेरणा की बात नही होगी अगर किसानो के लिए किसी योजना का नाम भावे के नाम पर रखा जाये या फिर कोई एअरपोर्ट होमी जहांगीर भाभा या  विक्रम  साराभाई के नाम से जाना जाये। अब जब इस बात पर कभीकभार बहस होनी शुरू हुई है, और गैर-गाँधी परिवार के लोग भी प्रधानमंत्री बनने लगे हैं, सत्तापक्ष विपक्ष का विपक्ष होने का फ़र्ज़ अदा करने के बहाने ही सही, अगर आम हिन्दुस्तानियों को थोड़ी इज्जत बख्शना शुरू कर दे, तो शायद सरकारी दस्तावेजों में गाँधीनेहरू के साथ आम आदमी भी इज्जत से खड़ा हो सकेगा। और चिंटू जी के साथसाथ कई और हिन्दुस्तानियों का सपना भी सच हो पाएगा

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s