मै कैसे संबोधित करूँ आपको, समझ नही आ रहा. श्री अरविन्द केजरीवाल कहूँ, मुख्यमंत्री साहब कहूँ या फिर भावी प्रधानमन्त्री साहब कहूँ! ऐसे सोचा तो यही था की आपको आम आदमी कह कर ही संबोधित करूँगा, लेकिन मुझे लगता है की अब आप आम आदमी रहे नही. न आम आदमी का जज्बा रहा, न उसके जैसी सोच और न एक आम आदमी की सैलरी ही, फिर काहे का आम आदमी.

आपका और इस देश का हितैषी हूँ, इसलिए कुछ हकीकतों से आपको बस रूबरू कराना चाहता हूँ, जिससे आपको शायद प्रधानमंत्री बनने में आसानी हो. आपको पता है, की आप दिन-ब-दिन इस देश की जनता की निगाहों में गिरते जा रहे हैं. पहले आपने आम आदमी पार्टी के संस्थापकों को निकाला, फिर अपनी सैलरी को ख़ास आदमी जितना बढ़ा लिया और फिर आखिर में अब आप टुच्चे राजनीतिज्ञों जैसी जात-पात जैसी राजनीती पर उतर आये हो. आपने लोगों को निकाला, सही किया, मगर बिना कोई ट्रायल के, बिना किसी रीज़न के, वो गलत किया. जो आम आदमी देश में जनता को पूछ कर पॉलिसी बनाने की बातें किया करता था, अचानक से वो इतना अहंकारी कैसे हो गया की बॉलीवुड स्टाइल में नो FIR, नो ट्रायल, फैसला ऑन द स्पॉट करने लगा. अरे इतनी आज़ादी तो अंग्रेजों ने भगत सिंह, सुखदेव को भी दी थी. उनका भी ट्रायल चला था, झूठा ही सही.

आपने अपनी सैलरी बढाई, चलो ठीक काम किया. अब आप भूखे रह कर, पसीने में सरोबार हो कर तो काम नही कर सकते न. वो दिन कुछ और थे जब अन्ना आन्दोलन में आप रेलवे स्टेशन पर अखबार बिछा कर सो जाया करते थे और हम उस फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर करते नही थकते थे. अब आप मुख्यमंत्री हैं, भावी प्रधानमंत्री है, तो भला आम आदमी वाली मुश्किलें क्यूँ झेले. खैर उससे मुझे कोई प्रॉब्लम भी नही है. मुझे प्रॉब्लम है उस अखबार और रेडियो के विज्ञापनों से, जिसपर आप हमारा पैसा, जनता का पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं. दिल्ली की कहानी गोवा के अख़बारों में सुना रहे हैं, पंजाब में बता रहे हैं, देश भर में ढिंढोरा पीट रहे हैं. अब इसपर अगर आप ये कहेंगे की आपके विरोधी भी यही करते हैं तो मै ये कहूँगा की आपके विरोधियों से हमने कभी और कोई उम्मीद भी नहीं की थी, आम आदमी आपको समझकर वोट किया था. जब विरोधी के जैसा ही काम करना था, तो हम अपना वोट आपको क्यूँ देते, विरोधियों को न देते, कम से कम उनकी कथनी और करनी में फर्क तो नही होता.

जाते-जाते एक और बात, ये जो पंजाब इलेक्शन के कारण आपने पंजाबी शिक्षा को अनिवार्य करना, पंजाबी शिक्षकों का वेतन बढ़ाना और फ्लाईओवर का पंजाबी नामकरण करना जैसी तुच्छ हरकतें कर रहे हैं न, ये आपको आम आदमी से निकाल कर मतलबी राजनीतिज्ञ की श्रेणी में लाकर खड़ी कर रही है. ये सब चीजें अगर आप कभी और करते न, जब इलेक्शन का नाम न होता, तो शायद आपको युगपुरुष मान भी लेता मै. लेकिन आज ये सारी चीजें कर के आप अपना घटता हुआ कद और घटा रहे हैं. जात-पात या धर्म-मजहब से ऊपर उठकर जो शिक्षक अपने स्टूडेंट्स में ज्ञान का अलख जगाये रखते हैं, उन शिक्षकों को आपने पंजाबी, बिहारी, मद्रासी स्तर पर बाँट दिया? फिर कैसी शिक्षा वो अपने स्टूडेंट्स को दे पाएंगे. एक पल के लिए नेताओं वाला कुरता पायजामा उतर कर, ज़रा आम आदमी वाला चोंगा पहन कर सोचिये, कुछ गलत दिखेगा आपको.

आपके किस्से तो और भी हैं, पर उनका जिक्र कभी और करूँगा. बस कहना इतना ही है की इन सब ओछी हरकतों से आप भले ही प्रधानमंत्री बन भी जाएँ, लेकिन याद रखियेगा, तब तक आम आदमी की नज़रों से आम आदमी गिर चूका होगा, आप गिर चुके होंगे. अफ़सोस इस बात का नही होगा की आप गिर चुके होंगे, क्यूंकि इस देश के लिए आपके जैसे कई आम आदमी कुर्बान होते आये हैं और कुर्बान होते रहेंगे, अफ़सोस बस ये रहेगा की तब तक आपने आम आदमी को आम आदमी की नज़रों में पूरी तरह गिरा दिया होगा.

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