IIT का रिजल्ट आ चुका है. कई बिहारियों ने बाजी मारी है. हर साल ही मारते हैं, IIT हो या IAS या कोई भी और एग्जाम, कोई नयी बात तो मै बता नही रहा हूँ. बिहारी लौंडे छोड़ते नही है कोई भी चीज. इस बार इसलिए बता रहा हूँ की अभी-अभी फर्जी टॉपर के नाम से दिन रात न्यूज़ चला-चला के मीडिया वालों ने बहुत TRP बढाई है और बहुत पैसा कमाया है. खैर उनको बधाई भी देता हूँ की उनकी वजह से मामला खुला और कई लोग फिलहाल के लिए तो अन्दर जा ही चुके हैं. अब ये तो आपको पता ही है की IIT में सेलेक्ट हुए किसी लौंडे का इंटरव्यू लेने मीडिया वाले तो जायेंगे नही, क्यूंकि बिहार की नेगेटिव इमेज ही बिकती है सारी मीडिया में, और जो बिकती है उसे ही बेचा और परोसा जाता है.

लेकिन इस टॉपर फर्जीवाड़े में जहाँ मीडिया ने इतनी चुस्ती दिखायी है, तो मुझे देश का सबसे खूनी फर्जीवाडा बरबस ही याद आ जा रहा है, जिससे मीडिया पता नही क्यूँ दूरी बना के बैठी है. इसका कारण राजनीतिक तो पक्का ही है क्यूंकि उस फर्जीवाड़े में राज्य के मुख्यमंत्री और उनकी फॅमिली भी संदेह के घेरे में है. फर्जीवाड़े का नाम है, व्यापम, व्यावसायिक परीक्षा मंडल. ये व्यापम राज्य सरकार के अंतर्गत आती है और शिक्षक, डॉक्टर, फ़ॉरेस्ट गार्ड, पुलिस जैसे महकमों में नियुक्ति के लिए परीक्षाएं आयोजित करवाती है. साल 2000 में इसके सुर्ख़ियों में आने के पहले तक लगभग 10-15 साल तक ये फर्जीवाडा होता रहा. इस फर्जीवाड़े की कहानी इतनी लम्बी है की 10-20,000 पन्नों में भी न आये. इसलिए इसकी मुख्य बातें आपको बताता हूँ:

मध्यप्रदेश में होने वाले इस एग्जाम में हर तरह से चोरी/फर्जीवाडा कराया गया. जैसे डमी कैंडिडेट बिठाना, चीटिंग कराना, OMR शीट एक्सचेंज करा देना, answer लीक कर देना और वैसे सभी तरीके जो आप सोच सकते हैं. ये सारे कैंडिडेट्स देश के कई राज्यों से पैसे दे कर बुलाये जाते थे और दूसरों की जगहों पर बैठ के एग्जाम देते थे. एग्जाम के बाद आंसर शीट को भी इधर-उधर कर के मार्क्स का घपला किया जाता था. इसमें ऊपर से ले कर नीचे तक हर तरह के लोग शामिल हैं. क्यूंकि बिना सबको दक्षिणा चढ़ाये 15 साल तक इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाडा करना संभव ही नही है.

इसका भेद खुलने के बाद से अभी तक 2000 लोग हिरासत में आ चुके हैं. इसकी जांच सीबीआई कर रही है. इस फर्जीवाडे से न जाने कितने ही डॉक्टर बन चुके हैं जो शायद कहीं न कहीं मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे होंगे. कई ऐसे शिक्षक होंगे जो बच्चों को पढ़ा कम रहे होंगे और पैसे कमाने के अलग-अलग तरीके ढूंढ रहे होंगे, आखिर जितना लगाया है शिक्षक बनने में उतना तो निकालेंगे न.

सबसे जरुरी बात की इससे जुड़े लोग जब-तब अन-नेचुरल डेथ का शिकार होते रहते हैं. कभी कोई बिचौलिया सड़क हादसे में मारा जाता है, तो कभी केस से जुडी किसी लड़की की लाश रेलवे ट्रैक के किनारे पाई जाती है, जिसे एक रेल से गिरने जैसी दुर्घटना मान कर केस बंद कर दिया जाता है. कभी जेल में बंद आरोपी की “नेचुरल” मौत हो जाती है. एक केस में तो बॉडी पंखे के नीचे बस पाई गयी थी, न रस्सी का नामोनिशान, न गले में कोई दाग, उसे भी सुसाइड मानकर केस रफा दफा कर दिया गया. हाल ही में इस केस की जांच से जुड़े एक पत्रकार की भी रहस्यमय हालत में मौत हो गयी, जो रेलवे ट्रैक के किनारे मिली लड़की के घरवालों से मिलकर पूछताछ कर रहे थे. इस मौत को भी “नेचुरल” डेथ मानकर उसकी भी फाइल बंद कर दी गयी.

कुल मिलाकर ये एक खुनी खेल है, जो बहुत ही सोच समझ कर खेला जा रहा है. इनके सामने तो फर्जी टॉपर वाला काण्ड कहीं टिकता भी नही है. हो मीडिया वाले भैया, कहाँ है आपलोग भाई? बिहार और दिल्ली को छोड़ कर कुछ और खबर भी दिखाइए. इ जो खुनी खेल चल रहा है और खूनी आराम से खुलेआम घूम रहा है, उसकी भी तनिक चिंता कीजिये.

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