योगा का अंतिम आसन – दालासन

दिल्ली की सड़कें नए-नए योगियों से पट चुकी थी. हर तरफ कई तरह के आसन कर रहे लोग चटाई बिछा-बिछा कर अपनी योग विद्या का प्रदर्शन कर रहे थे. इन सबके बीच देश के प्रधानमंत्री काफी खुश नज़र आ रहे थे, और भला खुश भी क्यूँ न हो, 2 साल में योग को विश्व स्तर पर ले जाने में उनका ही तो सारा योगदान था. उनकी छाती 56 से 58 इंच हुई जा रही थी. मीडिया देशी हो या विदेशी, खबरें और तसवीरें लेने में मगन था. इन सब हो-हल्ला के बीच एक और इंसान था, जो काफी खुश था. ये योग वाला दिन उसके लिए नया-नया था. कई दिनों बाद उसे लगा की अच्छी कमाई होगी. उसकी नज़रें योग करते लोगों पर नही थी, बल्कि वो तो ऐसे लोगों को ढूंढ रहा था जो योग कर के उठ रहे थे और अपने घर की तरफ जाने के लिए कोई सवारी ढूंढ रहे थे. ऐसे में मोटे तोंद वाले अंकल उठे और सबकी नज़र बचा के जल्दी से योग वाले स्पॉट से निकल कर घर जाने वाले स्पॉट की तरफ बढ़ने लगे. उस इंसान ने तोंद को देख लिया और अपनी साइकिल रिक्शा धीरे-धीरे उनकी तरफ ले जाने लगा.

“कहाँ चलेंगे, आइये न छोर दें,” रिक्शावाले ने धीरे-धीरे अपनी रिक्शा उनके पीछे लेते हुए कहा.
“नही नही, यहीं पास में घर है, चले जायेंगे हम पैदल,” तोंद वाले अंकल तेज़ कदमों से आगे बढ़ते रहे, मानो वो रिक्शा नही, दुश्मन का कोई टैंक हो.
“अरे सर, जो मन हो दे दीजियेगा, आइये बैठिये, हम पहुँचा देते है न,”

पहले तो तोंद वाले अंकल योग के तेज से पैदल ही निकल पड़े थे, लेकिन 10 कदम चलने पर याद आया की साल में एक दिन का योगा कर के कोई फायदा है नहीं. इसलिए वो चलते-चलते रुक गए और कहा,
“कितना लोगे?”
“अरे जो मन में आये दे दीजियेगा,”
“नही-नही बाद में कोई बकवास नही चाहिए, बोलो कितना लोगे,”
“अब आपसे क्या कहें, बरे लोग हैं, 60 रुपैया दे दीजियेगा,”
“अरे लूट मचा है क्या, यहाँ से मुश्किल से 2 km होगा, 50 देंगे, चलना है तो चलो,”

थोड़ी देर तक अपने गंदे भीगे हुए गमछे से अपना गन्दा पसीना पोछने के बाद उसने कहा,
“ठीक है, आइये, बैठिये, अब आप बारे लोग से क्या मोल-मोलइ करना,”

तोंद ने अपना सारा भार उस मरियल से दिखने वाले रिक्शा वाले पे रख दिया और रिक्शा चल पड़ी. तोंद ने सोचा अच्छा हुआ रिक्शा मिल गयी, नही तो जान निकल आती.
इधर वो गंदे से पसीने से नहाया हुआ गंदे रिक्शे वाले ने सोचा,
“चलो अच्छा है, 100 रुपैये रिक्शा का किराया देने के बाद कम से कम एक पाव दाल तो खरीद ही सकता हूँ. कई दिनों बाद आज तो दाल भी मिलेगी खाने को.
आज तो सच में दिन अच्छा है.”

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