मोहम्मद की रामलीला

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एक कहानी सुनाता हूँ आज आपको. एक बच्चे की कहानी. 10 साल का एक लड़का, एक छोटे से शहर का रहनेवाला. पढाई में ज्यादा तेज नही था, लेकिन बाकि चीजों में सबसे आगे. अपने शहर में होनेवाले हर नाटक, नौटंकी में पार्ट लेता और ऐसा जबरदस्त एक्टिंग करता की देखने वाले वाह-वाह कर बैठते. धीरे-धीरे उसका नाम उस छोटे से शहर से निकल कर बड़े शहरों में होने लगा, फिर पूरे देश में। लोग उसके अभिनय का लोहा मानने लगे. वो पतला सा सांवले रंग का लड़का इतना मशहूर हो गया की शहर-शहर घूम कर नाटक करने लगा. हर तरह के नाटक किये, कभी अमीर बन जाता, कभी गरीब बन जाता, किसी नाटक में विलन बन जाता तो किसी में हीरो. वो लड़का खुश था अपने काम से, अपने पड़ोसियों से, अपने दोस्तों से.

फिर एक दिन उसे एक रामलीला में एक्टिंग करने का मौका मिला। निभाना था उसे राम का किरदार। एक चुनौती थी उसके सामने राम बनकर लोगों के सामने जाने का, और उनके दिलों में उतर जाने का। रोल मुश्किल था लेकिन वो भी कहाँ हार मानने वाला था। उसने एक महीने पहले से रिहर्सल शुरू कर दी। अपने डायलॉग्स याद करने लगा, अपने इमोशन्स को सवांरने लगा। एक महीना ऐसे ही बीत गया और इस वक़्त उसने अपने आप को राम के किरदार के लिए ढाल लिया। राम और रामायण की कहानी उसने बचपन से सुन रखी थी, और आज उसे खुद राम बनने का मौका मिला था।

स्टेज तैयार था और राम की एंट्री होने ही वाली थी की तभी कुछ शोर हुआ। पता चला कुछ धर्म के ठेकेदार आये हैं और अपने को रामभक्त तो कहते हैं लेकिन रामलीला रुकवाने आये हैं.
“बंद करो, बंद करो, ये रामलीला बंद करो,”
किसी ने पूछा, “कौन हो भाई तुमलोग?”
“हम हैं जनता के सेवक।” शोर ने शोर किया।
“कहाँ से आये हो?”
“दिल्ली से।”
“क्या चाहते हो?”
“हम ये रामलीला रोकने आये हैं।”
“मगर क्यों, तुम्हारा राम से क्या बैर?”
“बैर राम से नही है, लेकिन एक मुसलमान राम नही बन सकता.”

“और क्या ये खुद श्रीराम कह कर गए हैं?”

“फालतू बातों के लिए हमारे पास वक़्त नही है, बंद करो ये रामलीला.”

“लेकिन राम ने तो…..”

समाज शराफत से कहता रहा लेकिन ठेकेदार तो ठेकेदार ठहरे. रामलीला रुकवा दी गयी. राम के कपडे पहने मोहम्मद से कपडे उतरवा लिए गए. एक कलाकार को नंगा कर दिया गया. लेकिन दरअसल नंगा कलाकार नही हुआ था, नंगा समाज हुआ था, ठेकेदारों के हाथों.

रामलीला किसी धर्म से ज्यादा अपने समाज का प्रतीक है. डायलॉग्स भले राम के हो, लेकिन माइक टेस्टिंग कोई इरफ़ान या गुलाम ही कर के देता है. कपडे सीता के हो लेकिन वो किसी इम्तियाज़ या रहमान टेलर मास्टर के हाथों ही सिल कर निकलते हैं. प्रसाद भले राम का हो, जिन बर्तनों में वो बनता है, वो किसी अजहर या शमीम कैटरिंग वाले के यहाँ से ही आते हैं.

नवाजुद्दीन सिद्दीकी कोई मुसलमान नही है. वो हमारा पडोसी है. कहीं पाकिस्तान में वो रामलीला नही कर रहे थे, उनका अपना घर था बुधना, जहाँ वो पले-बढे हैं, जहाँ की मिटटी की ऐसी खुशबू है की उनका बचपन से सपना था रामायण में मारीच बनने का. एक कलाकार को आपने सरेआम तमाचा मारा है, एक बच्चे के बचपन का सपना तोडा है.

मुझे पता है आप राम को नही जानते, न उनके बारे में पढ़ा है, नही तो जिस राम की रामलीला आप रुकवा रहे हैं, ये वही राम है जिहोने शबरी के जूठे बेर खाए थे, ये वही राम है जिन्होंने रावण के सामने अपना सर झुका कर उनसे आशीर्वाद माँगा था, ये वही राम हैं जिन्होंने अपने वनवास का दोषी न किसी को ठहराया न किसी से बदला ही लेने का सोचा. आज राम होते तो नवाज को गले लगा लेते, और लक्ष्मण के समकक्ष उनको खड़ा करके भाई बना लिया होता. अच्छा हुआ आज राम नही है, नही तो क्या पता, ये धर्म के ठेकेदार आज उनको फिर किसी और वनवास पर भेज दिए होते.

 

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