क्या नोटबंदी सिर्फ़ ग़रीबों के लिए ही है?

demon

नोटबंदी हुए एक महिने से ज्यादा हो चुके हैं। 8 नवम्बर को जोहानसबर्ग में मैं अपने ऑफिस में बैठा था और अमेरिका में हुए इलेक्शन के रिजल्ट का इंतज़ार कर रहा था। मेरे दायें बैठा एक बंदा ट्रम्प के जीत की भविष्यवाणी कर रहा था और बाएं बैठा बंदा हिलेरी पर दाँव लगा रहा था। ये सब चल ही रहा था कि सोशल मीडिया पर मैंने कुछ और देखा। देखा की हमारे हिंदुस्तान में demonetization हो गया है, मतलब नोटबंदी। 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए गए। हालाँकि इकोनॉमिक्स और करेंसी की समझ तो मेरी ज्यादा नही है लेकिन इतना लगा की अब जिन लोगों के पास ब्लैक मनी कॅश में होगी, उनका तो बंटाधार हो गया। कम से कम उन लोगों को तो सरकार पकड़ सकती है या उन बर्बाद हुए पैसे के बदले RBI नए नोट छाप कर अपने पास प्रॉफिट की तरह रख सकती है। अच्छा लगा सोच कर, ये पूरी बात मैंने अपने ऑफिस के अँगरेज़ लोगों को भी बताई और बताया कि हमारे देश की सरकार कितनी सक्षम है और कितना अच्छा काम कर रही है। मेरे पास भी 500 और 1000 के कुछ नोट थे, जिसके बर्बाद होने का दुःख नही था।

 

काले धन के अलावा आतंकवाद और फेक करेंसी इंडस्ट्री भी इससे टूट जायेगी, ऐसा माना गया था। कदम अच्छा था और इसकी हर जगह वाहवाहि भी हुई थी। लेकिन मुझे खुद इंडिया आये करीब 10 दिन हो चुके हैं और नोटबंदी हुए एक महीने से ऊपर बीत चुके हैं, लेकिन इसके परिणाम और असर कुछ और ही कहानी कहते हैं। ATM में लगी कतारें अब भी वैसी ही हैं। कई बंद पड़े हैं तो कई में हफ्ते में सिर्फ एक दिन, सोमवार को, ही पैसे होते हैं। 100 से ज्यादा लोग इन सब कारणों से मर चुके हैं, और आप मानिये या न मानिये, ये मौतें असली है। बैंक के बाहर जहाँ आम इंसान धूप या ठण्ड में लाइन लगा खड़ा है, वहीँ कई ऐसे बैंक मैनेजर और कर्मचारी है, जो कमिशन ले कर, पिछले दरवाजे से ब्लैक को व्हाइट कर रहे हैं। कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने 10 लाख से लेकर 4 करोड़ तक ब्लैक को वाइट किया है, और मुझे पूरा भरोसा है कि आपके भी सर्किल में ऐसे लोग होंगे या उनके बारे में आपने भी सुना होगा। हर दिन करोड़ो के नोट पकडे जा रहे हैं। हिंदुस्तान के हर कोने में ये गोरखधंधा चल रहा है। जहाँ आतंकवादियों के पास भी नए 2000 के नोट निकल रहे हैं, वहीँ 2000 के जाली नोट भी बाजार में आ चुके हैं। अभी हाल में ही 2000 के करोड़ों के जाली नोट पुलिस ने जब्त भी किये हैं और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है।

कितनी ब्लैक मनी सरकार को मिलेगी ये तो पता नही लेकिन लोगों का सारा ब्लैक 500 या 1000 की जगह अब 2000 के नोटों में अब भी या तो उनके पास है या बैंक्स में आराम से जमा है। सरकार ने अपनी वाहवाही जारी रखी है, पहले वो कालाधन पर सर्जिकल स्ट्राइक कहती थी और अब उसे कैशलेस इकॉनमी के नाम से रंग कर लोगों को परोस रही है। कुल मिलाकर आप और हम लाइन में लगे रहेंगे और लोग 10,000 करोड़ की शादी कर के प्राइवेट जेट से निकल लेंगे।

 

कई सेक्टर में धंधा धीमा हो गया है। लोग काम नही करवा पा रहे क्योंकि नोट नही है और जो बैंक में है, उनके निकालने पर लिमिट है। तो जब काम नही होगा तो जो ऐसे मजदूर है, जो हर दिन कमाते हैं ताकि उनका परिवार चल सके (जिन्हें Paytm नही पता, और जिन्हें कोई बैंक या कंपनी क्रेडिट कार्ड नही देती), आखिर वो लोग जाएँ तो जाएँ कहाँ, कहाँ जाएँ, क्या कमाएं, क्या खाएं। ये उन जैसे लोगों के लिए संकट ले कर आया है। हमारे हिंदुस्तान में 86% आज भी कैश में ही लेनदेन होता है, इसलिए जब कैशलेस इकॉनमी का नारा सुनने पर नाचने का मन करे न, तो थोड़ा रुक जायेगा, एक मिनट ये सोचियेगा की जो मजदूर आपका घर बना रहा, जो बाई आपके यहाँ काम कर रही, जिसके यहाँ आप अपने टूटे हुए जूते, चप्पल, छाते, घड़ी या कुछ और बनवाने जाते हैं, उनको भी आप क्रेडिट कार्ड से ही अगर पेमेंट करेंगे क्या। नारे होते ही हैं जोश में लाकर होश भुलाने को, इनसे बचिए। वैसे मेरे पास वो 1000 और 500 के नोट अब भी पड़े हैं। अगर बदलवाने बैंक जाऊं तो एक दिन की छुट्टी ले कर जानी पड़ेगी, और एक दिन की तनख्वाह बचाऊ तो फिर ये नोट नही बचा पाउँगा।

बाकि रविश कुमार के शब्दों में, बाकि जो है, सो तो हइये है।

 

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